उड़ने दो परिंदों को अभी शोख़ हवा में, फिर लौट के बचपन के ज़माने नहीं आते !

(दिव्यम- अनोखी प्रतिभा से सरोबार)

दौड़ने दो खुले मैदानों में नन्हे कदमों को साहब,
ज़िन्दगी बहुत भगाती है बचपन गुजर जाने के बाद..!!

बच्चों की हंसी में ईश्वर की ख़ुशी होती है,
बच्चों की मुस्कुराहट पर पूरी कायनात सिमटी होती है।


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