


मेरा नाम सुमन सौरभ है और मैं वैनी ग्राम खुदीराम बोस पूसारोड में रहती हूं। मैंने एम.ए. की शिक्षा प्राप्त की है, नेट (UGC) उत्तीर्ण किया है तथा वर्तमान में ललित नारायण मिथिला विश्वविद्याय में संगीत तथा नाट्य विभाग से शोध कर रही हूँ। 34 साल की उम्र में एक शिक्षिका के रूप में मैंने अपना करियर शुरू किया। 7 सालों से मैं, +2 शिक्षिका के रूप में कार्यरत हूं।
समाज जागृति का कार्य मैंने अपने पिताजी से सीखा है। अपने घर के ही एक हिस्से की साफ-सफाई करवा कर एक संगीत स्कूल की शुरूवात की। पहले पहल स्थिति थोड़ी निराशाजनक रही किंतु जैसे-जैसे समय गुजरता गया वैसे-वैसे बच्चे और उनके परिवार जन जागरूक हुए और उन्होंने बच्चों को भेजना शुरू किया। कुल मिलाकर औसतन 60 बच्चे आते हैं और उन्हें संगीत, पेंटिंग आदि की शिक्षा दी जाती है। यह निः शुल्क किया जाता है। एक छोटी सी लाइब्रेरी भी खोली गई है ताकि बच्चे लाभान्वित हो सकें। इस लाइब्रेरी को बड़ा करने की योजना है ताकि प्रतिस्पर्धाओं के लिए तैयार हो रहे बच्चों को भी सहायता मिल सके। हर रविवार को यह कक्षाएँ होती हैं। इसके अलावा मेहंदी और नृत्य की शिक्षा भी देती हूं।
मेरे भजन (गोसाई गीत) की कैसेट भी रिलीज़ हुई है। मेरा प्रयास अब लोकगीतों और सामाजिक सरकोरों से सम्बन्धित गीतों पर काम करने का है।
यह सब करना इतना आसान नहीं था, बहुत सी मुश्किलों का सामना करना पड़ा बावजूद इसके अपने शिक्षण कार्य को जारी रखा, विद्यार्थियों को पढ़ाने के तरीके में बदलाव किया। कक्षाओं को इंटरेक्टिव बनाया। पढ़ाते समय मैं विद्यार्थियों को विभिन्न गतिविधियों में संलग्न करती हूं। शिक्षण के अलावा मेरी दिलचस्पी शिक्षा, समाज सेवा, पर्यावरण संबंधित जागरूकता के प्रचार – प्रसार में है। बचपन से ही मेरे घर में ऐसा माहौल रहा है और मेरे माता-पिता मेरे पथ प्रदर्शक रहे। दोनों उदार मन और उदार विचारों के धनी रहे। उनके लालन-पालन में मेरे व्यक्तित्व का समुचित विकास हुआ।
मासिक धर्म को लेकर भी मैंने काम किया है। स्कूल की तरफ से प्रशिक्षण प्राप्त किया और इस क्षेत्र में लगातार काम कर रही हूं। जिसका प्रतिफल यह रहा कि जून 2022 में मुझे उत्कृष्ट कार्य हेतु M.H.M. स्टार सम्मान प्रदान किया गया। यह भी जोड़ दूं कि मैंने स्कूल की प्लस टू की छात्राओं को सैनिटरी पैड वितरित किया था। अपने स्कूल में एक गर्ल्स कॉमन रूम तथा सेनेटरी नेपकिन वेडिंग मशीन की व्यवस्था करवाई ताकि मासिक के 5 दिनों के दौरान स्कूल में बच्चियों की उपस्तिथि बढ़ सके। क्षेत्र के अन्य स्कूलों में भी मशीन लग सकें इस ओर भी तत्परता से प्रयासरत हूँ। जब भी किसी लड़की का जन्मदिन होता है उसके लिए केक मंगवाती हूं तथा पैड देती हूँ। इसके अलावा गांव भर में सैनिटरी नैपकिन पैड का वितरण भी किया है। एक कार्यक्रम भी अपने घर पर करवाया जिसमें पटना से डॉक्टरों को आमंत्रित किया गया, जहां उन्होंने स्वच्छता संबंधी बीमारियों का जिक्र किया तथा अन्य बीमारियों के बारे में भी ग्रामीणों को सजग किया जिनसे स्त्री का साबका होता है। कोरोना जैसे भीषण एवम तनावपूर्ण समय में भी मेरा प्रयास रहा कि असहाय लोगों को मदद की जा सके।
‘पे बैक टू सोसायटी’ की परिकल्पना में मेरा अटूट विश्वास है।
छोटे-छोटे नुक्कड़ नाटकों का निर्माण करना भी मुझे पसंद है जिनके जरिए मेरी कोशिश रहती है कि कोई ना कोई संदेश प्रेषित किया जाए। हाल ही में मुझे भारतीय ज्ञान रत्न, द रियल सुपर वूमेन, इंडियन एजुकेशन अवार्ड तथा बेस्ट टीचर ऑफ द ईयर से सम्मानित किया गया है।
एक शिक्षिका के रूप में, मैं चाहती हूं कि मेरे विद्यार्थियों को अकादमिक ज्ञान के अलावा जीवन की व्यापक समझ पैदा हो और वे समाज के जिम्मेदार सदस्य बन सकें।
अपने प्रयास से, मुझे विश्वास है कि सम्भवतः मैंने स्कूल तथा मुहल्ले के बच्चों को प्रेरित किया है। यह मेरे लिए संतोष का विषय है। आगे भी मैं शिक्षा, महिला स्वास्थ्य, स्त्री-समानता के प्रति जागरूकता, अंधविश्वासों के प्रति सजगता आदि मुद्दों पर पूरी निष्ठा से काम करती रहूंगी।
राह कठिन है, पर नामुमकिन नहीं है।



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